Rajeev Kale

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mandleshwar / आजाद फरोगे हस्ती की हिम्मत थी कि उसने फितरत से मौजों के थपेड़े माँगे थे और नाव पुरानी माँगी थी. | .
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मेरी रचना : मेरी पूंजी स्नेह आपका.

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